चट्टाख्ख
बिखरा है
कोने में
मेज के नीचे
एक कप
आँखिरी साँस
गिनता हुआ
गर्म भट्ठ़ो से निकलकर
खुबसुरत डिब्बों कि सवारी पर
जब आया था
पहली बार कैन्टीन मे
किसी खुबसूरत दुल्हे कि तरह
चमकदार
कई खुबसूरत हसीन हाथों को
चुमा था इसने और
चुमा था इसको
कई हसीन होठों ने
इसने देखें कई
प्रणय
और विरह
कभी
गहरी खामोशी
दो जोडी आँखों कि
याद है इसे वो दिन
जब प्रेमिका ने खुश होकर
लगाया था इसे सीने से
और दर्द मे
इसने ही सम्भाला था
उसके आँसुओं कि बूदों को
बुदों मे भीगा
इसका रोम-रोम
-------
रोम-रोम मे
धुआं ही धुआं
और बगल मे गर्म फेफड़े सी
ऐश-ट्रे और
ऐश-ट्रे मे
ख्वाहिशो
उम्मीदों
के अधजले टुकड़े
और सामने जिम्मेदारीयो से बोझिल
युवा मन
परत दर परत
खो रहा था अपनी चमक
ये कप
वक्त ने दिये इसे
कई निशान
टुटन
चिरकन
कप ने तय किया लम्बा सफर
आगे के टेबल से
पीछे के टेबल तक
और चला आया
उन काँपते हाथों मे
जिन्होंने अब तक सम्भाला था
टुटे फ्रेम का चश्मा
इसने चोर निगाहों से देखा था
पल्लू मे बंधा दस का नोट और
एक खुराक खांसी की
जानी थी इसने
मजबूरी भूख कि
और प्यास
लार मे चटचटाती
जीभ कि
काँपते हाथ
कब तक देते साथ
खत्म हो चुकी थी
कप कि भी बात
कोई बहाना न देख
गलती से छडी कप से टकराईं
सांसो ने छोडा साथ
और आवाज आयी
चट्टाख्ख
बिखरा है
कोने में
मेज के नीचे
एक कप
आँखिरी साँस
गिनता हुआ
गर्म भट्ठ़ो से निकलकर
खुबसुरत डिब्बों कि सवारी पर
जब आया था
पहली बार कैन्टीन मे
किसी खुबसूरत दुल्हे कि तरह
चमकदार
कई खुबसूरत हसीन हाथों को
चुमा था इसने और
चुमा था इसको
कई हसीन होठों ने
इसने देखें कई
प्रणय
और विरह
कभी
गहरी खामोशी
दो जोडी आँखों कि
याद है इसे वो दिन
जब प्रेमिका ने खुश होकर
लगाया था इसे सीने से
और दर्द मे
इसने ही सम्भाला था
उसके आँसुओं कि बूदों को
बुदों मे भीगा
इसका रोम-रोम
-------
रोम-रोम मे
धुआं ही धुआं
और बगल मे गर्म फेफड़े सी
ऐश-ट्रे और
ऐश-ट्रे मे
ख्वाहिशो
उम्मीदों
के अधजले टुकड़े
और सामने जिम्मेदारीयो से बोझिल
युवा मन
परत दर परत
खो रहा था अपनी चमक
ये कप
वक्त ने दिये इसे
कई निशान
टुटन
चिरकन
कप ने तय किया लम्बा सफर
आगे के टेबल से
पीछे के टेबल तक
और चला आया
उन काँपते हाथों मे
जिन्होंने अब तक सम्भाला था
टुटे फ्रेम का चश्मा
इसने चोर निगाहों से देखा था
पल्लू मे बंधा दस का नोट और
एक खुराक खांसी की
जानी थी इसने
मजबूरी भूख कि
और प्यास
लार मे चटचटाती
जीभ कि
काँपते हाथ
कब तक देते साथ
खत्म हो चुकी थी
कप कि भी बात
कोई बहाना न देख
गलती से छडी कप से टकराईं
सांसो ने छोडा साथ
और आवाज आयी
चट्टाख्ख
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