कितना चिकना हो गया हूँमैं
कमब्खत,आइना हो गया हूँ मैं
हर शख्स है खुश
मुझमें अपने जैसा देखकर,
मै भी हूँ खुश
मुखौटों कि आड़ से
अपने जैसा चेहरा देखकर
मुखौटे
मुस्कुराने वाले,
मुखौटे
रोने वाले,
फेसबुक पर
बहुत खुश होंने वाले,
अमीरी वाले,
गरीबी वाले,
और गरीबों के खातिर,
ढे़र सारे रौबीले मुखौटे,
बड़ी-बड़ी पार्टियो के खातिर
सख्त अभिमानी मुखौटे,
लम्बी नाक वाले
सिद्धान्तवादी मुखौटे,
राजनीतिक सभाओ के खातिर
जातिवादी मुखौटे,
चुपके से पहनता हूं
बातचीत के बीच
अवसरवादी मुखौटे,
भिंच गये हैं मेरे जबडे
मुखौटे के खाचों से
जुबान हिलती है
मगर
बोलती नही।
आँखे छलकती है
मगर
सोख लेते है आँसू
मुखौटे।
1 टिप्पणी:
Very deep and diffdiffe way of expressing.
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