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बुधवार, 5 दिसंबर 2018

निष्पक्ष

आज लिखना है मुझकों
कुछ निष्पक्ष
बेहद पाक
बच्चे कि मुस्कान जैसा
खेत मे लहलहाते धान जैसा
शान्त शमशान जैसा
माँ के आँचल छाँव जैसा

बेहद निष्पक्ष
पर
जब उठती है कलम
लिखती है स्याही मे
घोल के
विचारों मे
मेरा पक्ष
शब्द के तीर
चलते है
मेरे भावनाओं के
कमान से

शायद
हम जिन चीजों को
बाँध नहीं सकते शब्दों मे
उनका पक्ष
हमे निष्पक्ष
लिख दे।
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